विकास की अवधारणा एवं शिक्षण से इसके संबंध: विकास किसी बच्चे की आंतरिक एवं बाह्य वृद्धि एवं उनकी क्षमताओं का उद्भव या अंतर की प्रक्रिया है। इसे परिपक्वता के कार्य तथा पर्यावरण से उसकी परस्पर-क्रिया के रूप में भी समझा जा सकता है। विकास के विविध पहलू: 1. शारीरिक पहलू:- शारीरिक वृद्धि एवं विकास किसी व्यक्ति के भावनात्मक परिवर्तन को दर्शाता है। यह मूल रूप से बच्चे की ऊँचाई, वजन एवं शरीर के विकास से संबंधित है। विकास की दर प्रत्येक व्यक्ति में उसका/उसकी आयु वर्ग के आधार पर अलग-अलग होता हे। प्राथमिक समूह (6-9 वर्ष) के बच्चे मंद गति से बढ़ते है। दूसरी ओर, उच्च प्राथमिक छात्र, अपने से युवा छात्रों की तुलना में औसतन अधिक स्वस्थ होते हैं। उनकी थकान एवं रोग के प्रति प्रतिरोधकता अपेक्षाकृत अधिक होती हैं। अब, जब हम माध्यमिक एवं सीनियर सेकण्डरी स्कूल के बच्चों की बात करते हैं, उनकी किशोरावस्था यौवन के साथ शुरू होती है। आरंभिक चरण में परिवर्तन तेज गति से होता है, मध्य चरण में यह व्यवहार के पैटर्न की अपेक्षा स्थिर होता है और बाद का चरण जिम्मेदारियों एवं विकल्पों की तैयारियों से पहचाने ...
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